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	<title>अर्थव्यवस्था &#8211; Today Samachar 24</title>
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	<title>अर्थव्यवस्था &#8211; Today Samachar 24</title>
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		<title>भारत बनेगा बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स हब! सरकार को मिला हजारों करोड़ का निवेश प्रस्ताव, मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी रफ्तार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Arun Kumar]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Jul 2025 05:17:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कंपनियों से सौ आवेदन प्राप्त किए हैं और अगस्त में मंजूरी देने की योजना है। सरकार&#8230;]]></description>
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<p>भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कंपनियों से सौ आवेदन प्राप्त किए हैं और अगस्त में मंजूरी देने की योजना है।</p>



<p>सरकार को देश में इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण और असेंबली इकाइयां स्थापित करने के लिए 7,500 से 8,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले हैं। घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को इसकी जानकारी दी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि कुल मिलाकर इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना (ईसीएमएस) के तहत भारत में इकाइयां लगाने के लिए भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से करीब 100 आवेदन प्राप्त हुए हैं।</p>



<p>अधिकारी ने कहा, ‘हमने आवेदनों की जांच शुरू कर दी है और अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में हम सफल आवेदकों को मंजूरी देना शुरू कर देंगे। परियोजना प्रबंधन एजेंसी को भी जल्द ही अंतिम रूप दिया जा रहा है।’ केंद्र सरकार ने इस साल अप्रैल में 22,919 करोड़ रुपये की ईसीएमएस की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जों, डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल, बहुस्तरीय प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, डिजिटल ऐ​प्लिकेशन के लिए लीथियम-आयन सेल आदि के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।</p>



<p>इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना घरेलू स्तर पर बैटरी पैक, मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और अन्य डिवाइस के उत्पादन में उपयोग होने वाले पुर्जों जैसे कि रेसिस्टर, कैपेसिटर, इंडक्टर, ट्रांसफॉर्मर, फ्यूज, रेसिस्टर नेटवर्क और पोटेंशियोमीटर के घरेलू विनिर्माण के लिए भी प्रोत्साहन प्रदान करेगा।</p>



<p>यह योजना वित्त वर्ष 2025-26 से शुरू होकर 6 वर्षों तक चलेगी। इस योजना के तहत सरकार वृद्धिशील बिक्री के लिए प्रोत्साहन देने के बजाय कंपनियों द्वारा किए गए पूंजीगत खर्च में सहायता करेगी। इसके साथ ही सीधे तौर पर सृजित नौकरियों की संख्या के आधार पर प्रोत्साहन देने की योजना बना रही है। इसके साथ ही कंपनियों के सालाना कारोबार के आधार पर भी प्रोत्साहन देने का विचार शामिल है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पहले कहा था कि प्रत्यक्ष रोजगार सृजन की संख्या के लिए प्रोत्साहन का पता लगाने के लिए सरकार कंपनियों से पूछेगी कि वे अपनी विनिर्माण इकाइयों में कितने लोगों को रोजगार देने की योजना बना रहे हैं और उस संख्या के आधार पर उनका मूल्यांकन किया जाएगा।</p>



<p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पिछले एक दशक में 17 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है और वित्त वर्ष 2024 के अंत तक 9.52 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात इस दौरान 20 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़कर 2.41 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए इस योजना की शुरुआत के साथ सरकार को सेमीकंडक्टर विनिर्माण, सेमीकंडक्टर पुर्जा विनिर्माण और तैयार उत्पादों, जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्डवेयर और अन्य आईटी उत्पादों की तिकड़ी पूरा करने की उम्मीद है।</p>
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		<title>पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से होने वाली आय 13.15% घटकर 3.3 अरब डॉलर रह गई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Arun Kumar]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jan 2024 07:34:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
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					<description><![CDATA[निर्यात व्यापार बढ़ने के बावजूद इस साल मई में रिफाइनरी से निकले पेट्रोलियम उत्पादों से आय कम रही क्योंकि दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमत भी कम थीं। निर्यात&#8230;]]></description>
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<p>निर्यात व्यापार बढ़ने के बावजूद इस साल मई में रिफाइनरी से निकले पेट्रोलियम उत्पादों से आय कम रही क्योंकि दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमत भी कम थीं।</p>



<p> </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-1024x768.png" alt="" class="wp-image-407" srcset="https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-1024x768.png 1024w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-300x225.png 300w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-768x576.png 768w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image.png 1200w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>निर्यात व्यापार बढ़ने के बावजूद इस साल मई में रिफाइनरी से निकले पेट्रोलियम उत्पादों से आय कम रही क्योंकि दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमत भी कम थीं। पेट्रोलियम प्लानिंग ऐंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के हाल ही में जारी आंकड़ों से पता चला कि इस साल मई में पेट्रोलियम निर्यात से होने वाली आय 13.15 फीसदी घटकर 3.3 अरब डॉलर रह गई, जो पिछले साल मई में 3.8 अरब डॉलर थी।</p>



<p>मई में कच्चे तेल की कीमतें 60 से 62 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहीं, जो पहले 80 डॉलर प्रति बैरल थीं। इसलिए विमान ईंधन और हाईस्पीड डीजल के निर्यात में गिरावट आई। मगर वित्त वर्ष 2025 में निर्यात से होने वाली आय 30 फीसदी बढ़ गई क्योंकि प्रमुख निर्यातकों ने अपनी क्षमता का विस्तार किया।</p>



<p>इस बीच मई में कच्चे तेल के आयात पर खर्च 15.6 फीसदी घटकर 11.3 अरब डॉलर रह गया, जो एक साल पहले 13.4 अरब डॉलर था। आयात पर खर्च में गिरावट इसलिए दिलचस्प है क्योंकि मई में 2.33 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात हुआ, जबकि पिछले साल मई में केवल 2.2 करोड़ टन आयात ही हुआ था।</p>



<p>भारतीय रिफाइनरियों ने मई में लगभग उतना ही तेल शोधन किया, जितना पिछले साल मई में था। उस महीने के मुकाबले मात्रा केवल 0.4 फीसदी बढ़कर 2.31 करोड़ टन रही। मगर इसी अप्रैल के 2.15 करोड़ टन के मुकाबले इसमें 7.4 फीसदी वृद्धि रही। मई में रिफाइन किए गए कच्चे तेल में सरकारी तेल उपक्रमों और संयुक्त उद्यम की 1.56 करोड़ टन और निजी कंपनियों की 75 लाख टन हिस्सेदारी रही।</p>



<p>इस दौरान देश में कच्चे तेल का उत्पादन 23 लाख टन पर ठहरा रहा। अप्रैल के 21 लाख टन के मुकाबले उत्पादन में 9.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इनमें सरकारी ऑयल ऐंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) की 15 लाख टन और ऑयल इंडिया लिमिटेड (ऑयल) की 3 लाख टन हिस्सेदारी रही।</p>
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		<title>दुनियाभर में FDI गिरा, भारत ने कायम रखा 28 अरब डॉलर का स्तर, टॉप-15 में जगह पक्की</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Arun Kumar]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jan 2024 07:19:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
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					<description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (अंकटाड) की आज जारी रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक एफडीआई में 11 प्रतिशत गिरावट रही मगर भारत में आंकड़ा नहीं बदला। दुनिया भर में प्रत्यक्ष&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p> संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (अंकटाड) की आज जारी रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक एफडीआई में 11 प्रतिशत गिरावट रही मगर भारत में आंकड़ा नहीं बदला।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="768" src="https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-1-1024x768.png" alt="" class="wp-image-410" srcset="https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-1-1024x768.png 1024w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-1-300x225.png 300w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-1-768x576.png 768w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-1.png 1200w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>दुनिया भर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में गिरावट आई है मगर भारत में यह 28 अरब डॉलर पर बना रहा। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (अंकटाड) की आज जारी रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक एफडीआई में 11 प्रतिशत गिरावट रही मगर भारत में आंकड़ा नहीं बदला। भारत एफडीआई सूची में अपनी स्थिति सुधार कर एक पायदान ऊपर 15वें स्थान पर आ गया। साथ ही नई परियोजनाओं के लिए एफडीआई और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं के वित्तीय सौदों के एफडीआई में शीर्ष पांच देशों में भी उसका नाम कायम रहा।</p>



<p>संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास महासचिव रेबेका ग्रिनस्पैन ने कहा, ‘दुनिया में कई अर्थव्यवस्थाएं इसलिए पीछे नहीं छूट रही कि उनमें क्षमता नहीं है बल्कि इसलिए पिछड़ रही हैं क्योंकि पूंजी अब भी वहीं पहुंच रही हैं जहां आसानी से भेजी जा सकती है। जहां जरूरत है वहां पूंजी नहीं पहुंच पा रही हैं।’</p>



<p>2023 में भारत में एफडीआई प्रवाह 43 प्रतिशत कम होकर 28 अरब डॉलर रह गया था। 2024 में एफडीआई पाने के लिहाज से चीन भी दूसरे से फिसल कर चौथे स्थान पर चला गया। चीन में इस दौरान एफडीआई 163 अरब डॉलर से कम होकर 116 अरब डॉलर रह गया। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के आंकड़ों के अनुसार देश में एफडीआई पूंजी प्रवाह वित्त वर्ष 2014-25 में 50 अरब डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर 13 प्रतिशत अधिक था।</p>



<p>काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट में डिस्टिंगुइश्ड प्रोफेसर विश्वजित धर ने कहा, ‘भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2025 में भारत में शुद्ध एफडीआई प्रवाह (भारत से वापस भेजे गए निवेश को हटाने के बाद) लगभग 29 अरब डॉलर रहा। एफडीआई की गणना के लिए अंकटाड भी उसी विधि का प्रयोग करता है, जिसका रिजर्व बैंक करता है। फर्क इतना है कि अंकटाड कैलेंडर वर्ष के हिसाब से ऐसा करता है।’</p>



<p>अंकटाड एफडीआई आंकड़ों (शेयर एवं रकम प्रवाह एवं विदेश में विलय एवं अधिग्रहण, नई परियोजनाएं और अंतरराष्ट्रीय परियोजना वित्त सौदे) के आधार पर अंतरराष्ट्रीय निवेश रुझान पर रिपोर्ट जारी करता है। इन तीनों प्रकार की परियोजनाओं पर अलग-अलग विचार किया जाता है।</p>



<p>विकसित एवं तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में तकनीकी कंपनियों का परिचालन फैलते देखकर रिपोर्ट में भारत में माइक्रोसॉफ्ट के 3 अरब डॉलर निवेश का भी उल्लेख किया गया है। कंपनी ने यह निवेश क्लाउड और एआई ढांचे में किया है।</p>



<p>अंकटाड ने यह भी कहा कि ज्यादातर क्षेत्रों में परियोजनाओं संख्या बढ़ी है मगर कुछ ही देशों में घोषित नई परियोजनाओं के मूल्यांकन में इजाफा हुआ है जिसमें भारत भी एक है।</p>
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		<title>‘एडब्ल्यूएस जीडीपी में करेगी 23 अरब डॉलर का योगदान’</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Arun Kumar]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jan 2024 07:10:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[Food]]></category>
		<category><![CDATA[Green Living]]></category>
		<category><![CDATA[Healthy Eating]]></category>
		<category><![CDATA[Plant-Based]]></category>
		<category><![CDATA[Sustainability]]></category>
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					<description><![CDATA[कंपनी ने देश में क्लाउड सेवाओं और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए साल 2030 के अंत तक 12.7 अरब डॉलर का निवेश करने की&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p> कंपनी ने देश में क्लाउड सेवाओं और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए साल 2030 के अंत तक 12.7 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="576" src="https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-2-1024x576.png" alt="" class="wp-image-413" srcset="https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-2-1024x576.png 1024w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-2-300x169.png 300w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-2-768x432.png 768w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-2.png 1200w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>एमेजॉन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) साल 2030 तक भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 23.3 अरब डॉलर का योगदान करने की योजना बना रही है और साथ ही सालाना 1.31 लाख से ज्यादा नौकरियों में मदद करेगी। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने आज यह जानकारी दी। क्लाउड अवसंरचना क्षेत्र की कंपनी ने देश में क्लाउड सेवाओं और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए साल 2030 के अंत तक 12.7 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है।</p>



<p>एडब्ल्यूएस के अध्यक्ष (भारत और दक्षिण एशिया) संदीप दत्ता ने कहा, ‘हम सभी जानते हैं कि भारत एक लाख करोड़ डॉलर वाली डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने की कगार पर है। एडब्ल्यूएस के रूप में हम भारत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लगातार और गहरा कर रहे हैं।’ वे मुंबई में एडब्ल्यूएस शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।</p>



<p>जनवरी में कंपनी ने कहा था कि उसने महाराष्ट्र में एडब्ल्यूएस एशिया-प्रशांत (मुंबई) क्षेत्र में क्लाउड अवसंरचना में 8.3 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है। यह भारत में 12.7 अरब डॉलर की निवेश योजनाओं का हिस्सा था।</p>



<p>दत्ता ने कहा, ‘हम भारत के कौशल के अंतर को कम करने के अवसरों की तलाश के लिए सरकार और उद्योग के साथ लगातार काम कर रहे हैं। साल 2017 से भारत में एडब्ल्यूएस क्लाउड और संबंधित कौशल पर 59 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित कर चुकी है।’&nbsp;उन्होंने कहा कि कंपनी ने साल 2030 तक भारत में 200 अरब से अधिक स्मार्ट मीटर लगाने की योजना बनाई है।</p>
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		<title>Vadhvan Port के लिए ₹30,000 करोड़ जुटाएगी भारत की सबसे बड़ी पोर्ट बिल्डर कंपनी</title>
		<link>https://todaysamachar24.com/younger-population-seeing-high-rates-of-infection-amid-covid-surge-experts/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Arun Kumar]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jan 2024 07:10:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
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					<description><![CDATA[मुंबई से कुछ घंटे की दूरी पर स्थित वधावन पोर्ट प्रोजेक्ट लिमिटेड के मालिक 15 से 20 साल की अवधि वाले कर्ज जुटाने पर विचार कर रहे हैं। भारत का&#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p> मुंबई से कुछ घंटे की दूरी पर स्थित वधावन पोर्ट प्रोजेक्ट लिमिटेड के मालिक 15 से 20 साल की अवधि वाले कर्ज जुटाने पर विचार कर रहे हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-3-1024x768.png" alt="" class="wp-image-416" srcset="https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-3-1024x768.png 1024w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-3-300x225.png 300w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-3-768x576.png 768w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-3.png 1200w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह बनने जा रहे वधावन पोर्ट (Vadhvan Port) को बनाने वाली कंपनी लगभग ₹30,000 करोड़ (3.5 अरब डॉलर) का कर्ज जुटाने की योजना बना रही है। समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। इससे ऋणदाताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं में सुधार के एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में निवेश करने का अवसर मिलेगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">15 से 20 साल के लिए लिया जाएगा लोन</h2>



<p>मुंबई से कुछ घंटे की दूरी पर स्थित वधावन पोर्ट प्रोजेक्ट लिमिटेड के मालिक 15 से 20 साल की अवधि वाले कर्ज जुटाने पर विचार कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि फंड जुटाने के लिए देश और विदेश दोनों जगहों से पैसे उधार लेने की योजना बनाई जा रही है।</p>



<p>जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) के चेयरमैन उन्मेष शरद वाघ ने कहा, “हमने कर्ज जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो दो चरणों में पूरी होगी।” JNPA इस परियोजना में 74% की हिस्सेदारी रखता है, जबकि शेष 26% हिस्सेदारी महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड के पास है।</p>



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<h2 class="wp-block-heading">दुनिया के टॉप-10 बंदरगाहों में होगा शामिल</h2>



<p>9 अरब डॉलर की यह बंदरगाह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी पहल है। मोदी ने पिछले साल वधावन पोर्ट की आधारशिला रखी थी। परियोजना के इस दशक के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद यह पोर्ट करीब 2.3 करोड़ कंटेनर यूनिट संभालने की क्षमता वाला होगा, जिससे यह दुनिया के 10 सबसे बड़े बंदरगाहों में शामिल हो जाएगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">IDBI कैपिटल को बनाया गया सलाहकार</h2>



<p>वाघ ने बताया कि पहले दौर के फंडिंग के लिए दीर्घकालिक कर्जदाताओं को जोड़ने में मदद के लिए IDBI कैपिटल को सलाहकार नियुक्त किया गया है। पहले चरण में कम से कम ₹22,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य है। यह फंड अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। कर्जदाताओं से प्रस्ताव (RFP) अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही में मांगे जाएंगे।</p>



<p>वाघ, जो वधावन पोर्ट प्रोजेक्ट के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं, ने कहा कि JNPA और महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) साथ मिलकर इस परियोजना में करीब ₹13,000 करोड़ की इक्विटी लगाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी बहुपक्षीय एजेंसियों से बातचीत कर रही है और 1,200 हेक्टेयर जमीन को फिर से हासिल करने पर काम कर रही है।</p>



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<h2 class="wp-block-heading">इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोरर का बनेगा आधार</h2>



<p>देश के समुद्री ढांचे को मजबूत बनाना मोदी सरकार की प्राथमिकता है। फरवरी में पेश किए गए बजट में सरकार ने समुद्री क्षेत्र को समर्थन देने के लिए मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (Maritime Development Fund) का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत इक्विटी या डेट सिक्योरिटीज के जरिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।</p>



<p>फिलहाल भारत के किसी भी बंदरगाह की गहराई इतनी नहीं है कि वहां दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाजों को ठहराया जा सके, इस वजह से ऐसे जहाजों को भारत छोड़कर जाना पड़ता है। लेकिन वधावन पोर्ट की प्राकृतिक गहराई 20 मीटर है, जिससे यह बड़े जहाजों को संभालने में सक्षम होगा। यह बंदरगाह भारत–मध्य पूर्व–यूरोप कॉरिडोर (India-Middle East-Europe Corridor) की शुरुआत का आधार भी बनेगा, जो तीनों क्षेत्रों के बीच नए व्यापारिक रास्ते विकसित करने की एक योजना है।</p>
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		<title>‘पोत परिवहन में आत्मनिर्भरता लक्ष्य’-सर्बानंद सोनोवाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Arun Kumar]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jan 2024 07:08:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
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					<description><![CDATA[सरकार पोत परिवहन और जहाज निर्माण में नवाचारों के लिए यूरोप की ओर देख रही है तथा एशिया के प्रमुख शिपयार्डों से भारत में यार्ड स्थापित करने के लिए संपर्क&#8230;]]></description>
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<p> सरकार पोत परिवहन और जहाज निर्माण में नवाचारों के लिए यूरोप की ओर देख रही है तथा एशिया के प्रमुख शिपयार्डों से भारत में यार्ड स्थापित करने के लिए संपर्क कर रही है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="826" height="465" src="https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-4.png" alt="" class="wp-image-421" srcset="https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-4.png 826w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-4-300x169.png 300w, https://todaysamachar24.com/wp-content/uploads/2024/01/image-4-768x432.png 768w" sizes="(max-width: 826px) 100vw, 826px" /></figure>



<p>जापान, नॉर्वे और डेनमार्क के साथ बातचीत के बीच केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल भारत के उभरते पोत परिवहन क्षेत्र को विश्व मानचित्र पर लाने के लिए विश्व की यात्रा&nbsp;कर रहे हैं।</p>



<p>नॉर्वे में नॉर-शिपिंग व्यापार मेले का उद्घाटन कर लौटे मंत्री ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में बताया कि भारत पोत परिवहन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है और उसने कोचीन शिपयार्ड जैसे भारतीय यार्ड और प्रमुख वैश्विक निजी क्षेत्र के शिपयार्ड के बीच कई संयुक्त उद्यमों के लिए दबाव डाला है।</p>



<p>सोनोवाल ने कहा, ‘यात्रा के दौरान, भारत और निजी क्षेत्र की भारतीय कंपनियों ने जहाज विनिर्माण परिवेश को और मजबूत करने और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के प्रयास के साथ भारत में समुद्री उपकरण और मशीन बनाने के लिए साझेदारी बनाने पर सहयोग की संभावनाओं का पता लगाया।</p>



<p>जहाज निर्माण में भारत की मजबूत क्षमताओं को स्वच्छ और हरित प्रौद्योगिकियों के साथ बरकरार रखा जाना चाहिए, जिसके वास्ते सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए कई करार किए गए हैं जो हमें इस संबंध में अपनी स्थिति को ऊपर उठाने के लिए सशक्त बनाते हैं।’</p>



<p>सरकार पोत परिवहन और जहाज निर्माण में नवाचारों के लिए यूरोप की ओर देख रही है तथा एशिया के प्रमुख शिपयार्डों से भारत में यार्ड स्थापित करने के लिए संपर्क कर रही है।</p>
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